कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति की ..
जिन्ना जबतक कांग्रेस में थे,वंदेमातरम कोई निर्णायक विवाद नही था।

कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति की,जिन्ना जबतक कांग्रेस में थे,वंदेमातरम कोई निर्णायक विवाद नही था,कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इसे मुस्लिम लीग का औजार बनाया,और गीत को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया,गीत वही रहा,लेकिन एजेंडा बदल गया-CM योगी
15 अक्टूबर 1937 को इसी लखनऊ से मो अली जिन्ना ने वंदेमातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया,और उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित नेहरू थे।
20 अक्टूबर 1937 को नेहरू जी ने सुभाष चंद्र बोस जी को पत्र लिखा और कहा इसकी पृष्टभूमि मुस्लिमों को असहज कर रही है
26 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस ने गीत के अंश को हटाने का निर्णय किया, इसको सद्भाव कहा गया,जबकि वास्तविकता में यह तुष्टिकरण की पहली आधिकारिक मिसाल थी
यह चर्चा इसलिए आवश्यक है कि इतिहास केवल तथ्य नही एक चेतावनी भी है,क्योंकि नई पीढ़ी को सच्चाई जानने का अधिकार होना चाहिए,क्योंकि राष्ट्रगीत एक गीत नही है,हम भारतीयों के लिए एक संस्कार भी है
जो समझौता 1937,38 में देश की कीमत पर किया गया था,जिन लोगो ने किया था,और जो लोग जाने अनजाने में आज वंदेमातरम राष्ट्रीय गीत का विरोध व बहिष्कार कर रहे हैं,उन्हें इस देश वासियों से माफी मांगनी चाहिए..



