उत्तर प्रदेश

देश के पहले टेबल पंचांग के दूसरे वर्ष के संस्करण का विमोचन

पंचांग का विमोचन आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने किया

लखनऊ

रामनवमी के पावन अवसर पर पायनियर मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज में आयोजित देश के पहले टेबल पंचांग के दूसरे वर्ष के संस्करण का विमोचन किया गया, जिसके निर्माणकर्ता श्याम सुन्दर पाठक हैं ।

पंचांग का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख श्री स्वान्त रंजन , गौसेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्त, वरिष्ठ आई.पी.एस अधिकारी अखिलेश निगम, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती प्रियंका मौर्या, वरिष्ठ लेखक डॉ. शीलवन्त सिंह, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की साध्वी अम्बिका भारती व विद्यालय प्रबन्धक डॉ. ब्रजेन्द्र सिंह जी ने किया । मुख्य वक्ता स्वान्त रंजन ने भारतीय काल गणना की वैज्ञानिकता, प्राचीनता और उसकी वृहद सामाजिक व दैनिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व को सबसे पहले कालगणना, ज्योतिष व पंचांग निर्माण की सूर्य व चन्द्र आधारित गणना का बोध कराया । उन्होंने भारतीय इतिहास में काल निर्धारण में हुई अनेक विसंगतियों को इंगित करते हुए चेताया भी कि हमें अपनी जड़ों से जुड़ना है, अपनी महानतम संस्कृति की आधारभूत विशेषताओं- वसुधैव कुटुम्बकम व सर्वे भवन्तु सुखिनः को पुनः आत्मसात करते हुए पुनः भारत तो विश्व का मार्गदर्शक व विश्वगुरू बनाना है । स्वान्त जी ने इस बात पर भी जोर दिया कि अपनी दैनन्दिन जीवन में हमें भारतीय कालगणना का उपयोग करना है । अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ व अन्य शुभ कार्य हिन्दू तिथि के आधार पर करना है, तभी हम इसकी महानता व दिव्यता को समझ पायेंगे। उन्होंने पंचांग निर्माणकर्ता श्याम सुन्दर पाठक की प्रशंसा करते हुए कहा कि अपने व्यस्ततम राजकीय कार्य दायित्वों को निभाते हुए भी अपनी संस्कृति के लिए किए जा रहे प्रयास प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनुकरणीय भी है । गौसेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्त ने इस दिव्य ज्योति पंचांग की भूरि- भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि हमें पंचांग के महत्व को समझना है । हमारे ऋषि- मुनियों व विद्वानों ने अनेक शुभ व अशुभ मुहूर्तों का उल्लेख नहीं किया । साथ ही जीवन में आ रहे अनेक कष्टों के उपायों को गौ माता से जोड़ते हुए कहा कि गौ माता की सेवा से जीवन में सारे कष्ट मिट जाते हैं और जीवन में चतुर्विध उन्नति व प्रगति के मार्ग खुल जाते हैं । वरिष्ठ आई.पी.एस अधिकारी अखिलेश निगम ने आज की पीढ़ी को जागृत और चेताते हुए कहा कि आज की पीढ़ी अपनी संस्कृति, तीज- त्यौहारों के महत्व व उसके वैज्ञानिक, सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व से कोसों दूर हो गए हैं । दिव्य ज्योति पंचांग के द्वारा वे आसानी से भारतीय कालगणना व उसकी वैज्ञानिकता व महत्व को समझ पायेंगे । साथ ही उन्होंने भारत को श्रेष्ठ भारत बनाने के लिए नशामुक्त भारत का संकल्प भी दोहराया। दिव्य ज्योति पंचांग निर्माणकर्ता श्याम सुन्दर पाठक ने इस पंचांग के निर्माण के पीछे के उद्देश्य को प्रकट करते हुए कहा कि अपने ज्योतिष ज्ञान को अर्जित करने के दौरान उन्होंने महसूस किया कि जो प्रचलित पंचांग है वे ज्योतिष व पंचांग विशेषज्ञ के लिए समझना भले आसान हो लेकिन आम व्यक्ति के लिए उसे समझना बहुत कठिन था, जबकि पंचांग प्रत्येक व्यक्ति के लिए हर दिन उपयोग में लाना जीवन में सफलता की गारंटी देता है । यह पंचांग आम जनमानस के लिए उन्हीं की सरल भाषा में और हर पहलू पर तार्किक प्रकाश डालते हुए बनाया गया है । इसकी हर साल बढ़ती लोकप्रियता – इसकी उपयोगिता को इंगित करती है । साध्वी अम्बिका भारती जी ने जोर देते हुए कहा कि अध्यात्म के माध्यम से ही जीवन की, समाज की और यहाँ तक कि सम्पूर्ण राष्ट्र की हर समस्या का समाधान सम्भव है। अन्त में विद्यालय के प्रबन्धक डॉ. ब्रजेन्द्र सिंह समस्त अतिथियों को स्मृति चिन्ह देते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच संचालन रसना तिवारी ने किया । अनुराग पुष्कर, सूर्य प्रकाश हवेलिया जी, बुद्धेश मणि जी समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।”

Related Articles

Back to top button